Pragya Sangeet

299.00

By: Dr. Ashok Kumar Yadav

ISBN: 9789366659879

Language: Hindi

Pages: 160

Format: Paperback

Category: NONFICTION / Music / Classical

Delivery Time: 7-9 Days

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आज का संगीत, फ़िल्मी संगीत के कारण फैली अवांछनीयता की शिकायत हर सुरुचि-संपन्न व्यक्ति करता है, जिसके कारण समाजव्यापी शालीनता पर गहरी चोट पहुँची है। युगानुकूल समस्या के समाधान हेतु, भारतीय संस्कृति की इस अमूल्य धरोहर को जीवंत एवं जागृत बनाए रखने के लिए ऐसे कला एवं संगीत को बढ़ावा देने की आवश्यकता है, जो समाज व राष्ट्र में मूल्यों की स्थापना कर सके। परमपूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने प्रज्ञा संगीत का निर्माण प्राचीन काल से चली आ रही परंपरा (जैसे—मीरा, सूरदास, कबीरदास, चैतन्य महाप्रभु) को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से किया। यद्यपि गायत्री परिवार द्वारा प्रकाशित गीतों की अनेक पुस्तकें उपलब्ध हैं, इस प्रज्ञा संगीत पुस्तक में छह अध्यायों का वर्णन है, जिसमें प्रज्ञा संगीत की उत्पत्ति, महत्त्व, इतिहास, परिभाषा, प्रकार, गायन शैली, साहित्य, वाद्ययंत्र, कवि, गायक, वादक, ताल, प्रभाव, विशेषताएँ एवं सिद्धांतों का विस्तार से वर्णन किया गया है। अतः संगीत विषय के अंतर्गत प्रज्ञा संगीत पढ़ने वाले विद्यार्थियों तथा गायत्री परिजनों के लिए यह पुस्तक अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। परम वंदनीया माताजी ने कहा था—आने वाले समय में परमपूज्य गुरुदेव के प्रवचनों एवं गायत्री परिवार के गीतों के माध्यम से समाज एवं राष्ट्र को सही दिशा मिलेगी। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर पुस्तक लेखन का कार्य किया गया है, जिससे संगीत के माध्यम से “लोकरंजन से लोकशिक्षण” की भावना को साकार करते हुए लोकमंगल का कार्य संपन्न हो सके।

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