मनुष्य ने जब से आकाश की ओर देखा, तब से उसने देवताओं की कल्पना की; भय, आशा, जिज्ञासा और करुणा, इन सबने मिलकर देवत्व को नाम दिया, रूप दिया और कथा बना दी। परंतु सृष्टि केवल उतनी नहीं है जितनी दिखाई देती है, और देवत्व भी केवल उतना नहीं है जितना पूजा में समा जाए। धर्मग्रंथों ने जिन देवताओं का वर्णन किया, वे मानव चेतना की एक सीमा तक की अभिव्यक्ति थे, लेकिन चेतना स्वयं असीम है। उसी असीम चेतना के मध्य ऐसे स्तर भी हैं जहाँ न मंत्र गूँजते हैं, न नाम पुकारे जाते हैं, फिर भी सृष्टि का संतुलन वहाँ से नियंत्रित होता है। यह पुस्तक उन्हीं अदृश्य स्तरों की ओर संकेत करती है—उन देवशक्तियों की ओर, जो न इतिहास में दर्ज हैं, न परंपरा में पूजी गईं, पर जिनके बिना कर्म, भाग्य और आत्मा की यात्रा अधूरी है। यह लेखन कल्पना नहीं, अनुभव का अनुवाद है; यह न किसी विश्वास को तोड़ता है, न नया विश्वास गढ़ता है, बल्कि पाठक को उस बिंदु तक ले जाने का प्रयास करता है जहाँ प्रश्न स्वयं उत्तर बन जाते हैं। “अनदेखे देवता” उन शक्तियों का नाम है जो ईश्वर और मनुष्य के बीच सेतु की तरह कार्य करती हैं—न दिखाई देती हैं, न हस्तक्षेप करती प्रतीत होती हैं, पर हर जीवन-घटना में उनकी छाया विद्यमान रहती है। यह पुस्तक उसी छाया को समझने का प्रयास है, ताकि मनुष्य पहली बार यह देख सके कि जो अब तक अनदेखा था, वह कभी अनुपस्थित नहीं था।
RELIGION / Spirituality
Andekhe Devta: Ve Jo Dharmgranthōn Mein Nahin Hain
₹170.00
By: Kabir Shah
ISBN: 9789366650746
Language: Hindi
Pages: 58
Format: Paperback
Category: RELIGION / Spirituality
Delivery Time: 7-9 Days





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