प्रकृति पर लेखन की शुरुआत तब हुई जब अपने कार्य क्षेत्र भ्रमण के दौरान मैंने लोकप्रिय समाचार पत्र में एक समाचार “शुद्ध हवा बोतलों में बंद कर दिल्ली में बेचीं जा रही है। इस समाचार ने प्रकृति की चेतावनी देती हुई मौन पुकार को गंभीरतापूर्वक सुनने और समझने पर विवश कर दिया। माँ समान प्रकृति ने हमें क्या नहीं दिया है लेकिन प्रदूषित हवा, सूखते और प्रदूषित होते तालाब, पोखर एवं नदियाँ, पेड़ -पौधों की कटाई, घटता भूजल स्तर आदि एक गंभीर सन्देश दे रहे कि हम प्रकृति के प्रति अपने दायित्व को भी समझे। यह पुस्तक केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि प्रकृति की उस मौन पुकार की छोटी सी प्रस्तुति है, जिसे हम अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी में अक्सर अनसुना कर देते हैं। प्रकृति की इस छोटी सी प्रस्तुति में जीवन का आधार जल, भूजल के विविध आयामों, धरा की गहना नदी, तालाब और पोखर, हमसे बिछुड़ती हमारी नन्ही दोस्त गौरैया के विषय में वर्णन किया गया है। पेयजल और सिंचाई के लिए भूजल पर हमारी निर्भरता सर्वविदित है। इस पुस्तक के माध्यम से प्रकृति प्रदत इस महत्वपूर्ण संसाधन भूजल की गुणवत्ता, उपलब्धता और सहभागिता द्वारा इसके प्रबंधन के विषय में भी आमलोग तक जानकारी पहुँचाने का एक प्रयास है।
POETRY / General
Prakriti Ki Gunj
₹199.00
By: Rajiv Ranjan Shukla
ISBN: 9789366654539
Language: Hindi
Pages: 64
Format: Paperback
Category: POETRY / General
Delivery Time: 7-9 Days





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