“प्रत्येक कविता में भाव धारा, प्रत्येक भाव धारा में योग धारा” मधु दानी का पहला कविता प्रकाशन “योगांजलि प्रवाह” जिसमें स्वशोध के साथ समग्र कल्याण हेतु प्रार्थना मनोविज्ञान, योग और शिवयोग के रंगों को पिरोया गया है। इसमें आप पाएँगे-मन की शांति, स्वबोध, मन की गहराइयों की अनुभूति, स्व की खोज एवं अभिव्यक्ति। मन, आत्मा और शरीर के द्वारा “योगांजलि प्रवाह” का उत्कर्ष पाथ… गुरु ज्ञान विस्तार जिजीविषा…
POETRY / General
Yoganjali Pravah: Vichar Chintamani
₹250.00
By: Madhu Dani
ISBN: 9789366656489
Language: Hindi
Pages: 120
Format: Paperback
Category: POETRY / General
Delivery Time: 7-9 Days





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