यह किताब’ सत प्रतिशत, सत्यता को समेटे है। इसके ‘तंज़’ वास्तव में हमारे नशे में होने को उजागर करने का प्रयास कर रही है । इसमें मैं कहां तक सफल हूं, इसका निर्णय आप पर छोड़ता हूं। “मैं नशे में हूं” ….. यहां “मैं” का मतलब आप से भी है, जो किसी न किसी प्रकार से नशे में हैं। नशा वो नहीं…. जिससे आप परिचित हैं, नशा वो नहीं…. जिसका सेवन मैं, आप या हमारे आसपास के लोग करते हैं। नशा वो है…. जो हीनता के ताज को पहने घूम रहा है। नशा आडंबर का भी है, नशा आलस्य का भी है, नशा लालच का भी है, नशा अहंकार का भी है, नशा ईर्ष्या का भी है । और न जाने कितने इन्हीं के समान दैत्यों से घिरा भी है, जिसकी उपस्थिति मात्र से हम सभी अपने मूल कर्मों का अमृतपान करना भूल चुके हैं। यहां मैं, आप, वो… सभी, अनजाने में एक अदृश्य और अजब तरीके के नशीले तत्वों का सेवन किए हुए नशे में झूम रहे हैं और यह सच में पूरी पृथ्वी के लिए हानिकारक सिद्ध होता हुआ दिखाई दे रहा है । मेरे द्वारा इस किताब को लिखे जाने का उद्देश्य किसी के हृदय को ठेस पहुंचाना नहीं है, और न ही कुछ समझाना है, न तो किसी को सुधारना है। मेरी आंखों ने जितना देखा, मेरे मस्तिष्क ने जितना समझा… उन सभी दृश्यों को उन सभी वक्तव्यों को मेरी कलम ने कागज पर उतार दिया, जो एक किताब का रूप लेकर आप ‘प्रिय पाठक सज्जनों’ के बीच है। इस किताब में लिखे गए एक भी शब्द से अगर,, किसी शहर, किसी गांव, किसी धर्म, किसी जाति, किसी लोगों का अपमान हुआ हो तो, आप सोच रहे होंगे कि मैं आपसे क्षमा प्रार्थना करूंगा, तो यहां पर आप ग़लत साबित हो सकते हैं। क्योंकि” आप ही की भांति…… “मैं नशे में हूं”।
Social Commentary
Tanz: Bheed Tantra Ki Bhend Chaal
₹250.00
By: Rana Dahir
ISBN: 9789366651279
Language: Hindi
Pages: 122
Format: Paperback
Category: Social Commentary
Delivery Time: 7-9 Days

Reviews
There are no reviews yet.