Aadhunik Geeta (Bhag-1)

299.00

By: Maharishi Shrenik

ISBN: 9789366658841

Language: Hindi

Pages: 160

Format: Paperback

Category: RELIGION / Spirituality

Delivery Time: 7-9 Days

Add to Wishlist
Add to Wishlist

आधुनिक गीता वह ग्रंथ है जो आज के मानव जीवन के लिए मार्गदर्शन का दीपक है। भगवान श्रीकृष्ण की गीता का आज के समाज और मनुष्य को देखते हुए इस आधुनिक गीता का निर्माण किया गया है इस ग्रंथ मे बताया गया है की किस प्रकार मनुष्य समाज रहते हुए भी मुक्ति प्रदान कर सकता है, मनुष्य को दान किसे करना चाहिए मनुष्य जन्म का कर्तव्य कर्म क्या है किस प्रकार आप अपने गृहस्थ जीवन को सुख पूर्वक बना सकते हो जैसे कुरुक्षेत्र की भूमि पर अर्जुन के संशय और मोह को दूर कर श्रीकृष्ण ने गीता के अमृत उपदेश दिए, वैसे ही यह आधुनिक गीता आज के युग के भटके हुए मनुष्य के लिए प्रकाशित होती है। इसमें बताया गया है कि मनुष्य का जीवन तभी सफल होता है जब वह अहंकार और आसक्ति से मुक्त होकर परमात्मा के चरणों में शरणागत हो। शरणागति ही मुक्ति का द्वार है, और यही साधना को सरल और सहज बना देती है। आधुनिक गीता में मानव-जीवन के भीतर सक्रिय सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण का गहन विवेचन है। यह समझाया गया है कि तमोगुण अंधकार, आलस्य और मोह का कारण है; रजोगुण इच्छाओं, वासनाओं और चंचलता का कारण है; और सतोगुण शांति, करुणा और विवेक का आधार है। परंतु अंतिम लक्ष्य केवल सतोगुण में टिकना नहीं, बल्कि गुणातीत होकर आत्मस्वरूप का अनुभव करना है। इस ग्रंथ में योग और साधना का महत्व भी प्रतिपादित है। योग केवल शरीर या प्राण का अभ्यास नहीं, बल्कि मन, इन्द्रियों और चेतना को अनुशासित करने की प्रक्रिया है। जब मनुष्य योगमार्ग पर चलता है, तब वह धीरे-धीरे आत्मजागरण की ओर अग्रसर होता है। वैराग्य को इसमें गहराई से समझाया गया है। वैराग्य का अर्थ संसार का त्याग नहीं, बल्कि मोह और आसक्ति से मुक्ति है। जब मनुष्य भोगों के आकर्षण से ऊपर उठता है, तब उसकी चेतना परमात्मा की ओर प्रवाहित होती है। आधुनिक गीता यह भी स्पष्ट करती है कि मनुष्य का जीवन केवल भक्ति और साधना तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे अपने कर्तव्य और धर्म को भी निभाना चाहिए। निष्काम भाव से कर्म करना ही वास्तविक पूजा है। इस ग्रंथ का अंतिम स्वर प्रेम और श्रद्धा है। जब साधक के हृदय में सच्चा प्रेम और गहन श्रद्धा उत्पन्न होती है, तब वह सहज ही भक्ति में रम जाता है और परमात्मा से मिलन की ओर अग्रसर होता है।

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Aadhunik Geeta (Bhag-1)”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shopping Cart
Scroll to Top
Form
Sign Up for Unbeatable Offers