Aadhunik Geeta (Bhag-2)

₹299.00

By: Maharishi Shrenik

ISBN: 9789366658827

Language: Hindi

Pages: 166

Format: Paperback

Category: RELIGION / Spirituality

Delivery Time: 7-9 Days

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श्रीमद्भगवद्गीता के उत्तरार्ध में दिए गए गहन आध्यात्मिक संदेशों को सरल, सहज और जीवनोपयोगी भाषा में प्रस्तुत करने का प्रयास है। यह पुस्तक केवल श्लोकों का अर्थ बताने तक सीमित नहीं है, बल्कि मनुष्य को अपने जीवन, कर्म, विचार, भावनाओं और आत्मिक स्वरूप को समझने की दिशा प्रदान करती है।इस पुस्तक में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिखाए गए विराट रूप का अद्भुत वर्णन मिलता है। विराट रूप के माध्यम से यह समझाया गया है कि समस्त संसार, चर-अचर प्राणी, सृष्टि की उत्पत्ति और विनाश,सब कुछ परमात्मा की अनंत सत्ता में समाहित है। अर्जुन की प्रार्थना, भगवान का दिव्य रूप, दिव्य चक्षु का रहस्य और उस विराट दर्शन से उत्पन्न विस्मय, भय और समर्पण पाठक के भीतर भी ईश्वर की व्यापकता का अनुभव जगाते हैं। यह संदेश आज के समय में भी उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि आतंक, हिंसा, संघर्ष और अशांति का स्थायी समाधान केवल बाहरी व्यवस्था से नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर करुणा, विवेक, संयम और आत्मबोध के जागरण से संभव है।पुस्तक में भक्ति के वास्तविक स्वरूप को भी अत्यंत सरल ढंग से समझाया गया है। सच्चा भक्त वही है जो सुख-दुःख, मान-अपमान, लाभ-हानि और मित्र-शत्रु के बीच समभाव बनाए रखता है। भक्ति केवल पूजा, व्रत या धार्मिक अनुष्ठान का नाम नहीं, बल्कि शुद्ध विचार, विनम्र व्यवहार, सेवा, करुणा, संयम और परमात्मा में विश्वास से निर्मित जीवन-पद्धति है। ज्ञानमार्ग, भक्तिमार्ग, ध्यान और त्याग इन सभी साधनाओं का उद्देश्य मनुष्य को अहंकार, भय, मोह और आसक्ति से मुक्त कर आत्मिक शांति प्रदान करना है।शरीर और आत्मा के संबंध को भी स्पष्ट करती है। शरीर को एक क्षेत्र और आत्मा को उस क्षेत्र का ज्ञाता बताते हुए यह समझाया गया है कि मनुष्य केवल शरीर, मन या बुद्धि नहीं है। उसके भीतर एक चेतन सत्ता विद्यमान है, जो शरीर, इंद्रियों और विचारों को देखने वाली साक्षी है।

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