कभी-कभी ज़िंदगी में बहुत कुछ होता है, लेकिन जब उसे शब्दों में लिखने बैठते हैं, तो समझ नहीं आता कि शुरुआत कहाँ से करें। आज लिखने का बड़ा मन है, मगर क्या लिखूँ… किसी एक व्यक्ति की कहानी नहीं है। यह उस आम इंसान की कहानी है जो सपने देखता है, ज़िम्मेदारियाँ निभाता है, काम के पीछे दौड़ता है, रिश्ते बनाता है, कुछ रिश्ते खोता है, पैसा कमाता है, सफलता चाहता है, चोट खाता है, मुस्कुराता है और बहुत-सी बातें अपने भीतर ही रख लेता है। यह पुस्तक बचपन से लेकर बढ़ती उम्र तक जीवन के उन्हीं सवालों को छूती है जिन्हें हममें से बहुत लोग महसूस तो करते हैं, लेकिन शायद कभी शब्द नहीं दे पाते। यह पुस्तक इन सवालों के जवाब देने की कोशिश नहीं करती। यह पाठक को अपनी ही ज़िंदगी के जवाब खोजने के लिए थोड़ी देर रुकने का अवसर देती है। शायद इसे पढ़ते हुए कभी कोई पुराना सपना याद आए, कभी कोई अपना, कभी कोई अधूरी बात और कभी वह इंसान, जो ज़िम्मेदारियाँ निभाते-निभाते हमारे भीतर कहीं पीछे छूट गया। क्योंकि अंत में सवाल शायद यह नहीं कि हमारी कहानी में क्या-क्या हुआ। सवाल यह है कि उस कहानी को जीते-जीते हम कौन बन गए।
FAMILY & RELATIONSHIPS / Life Stages / General
Aaj Likhne Ka Bada Man Hai, Magar Kya Likhun…
₹250.00
By: Prem Mohan Tyagi
ISBN: 9789366658599
Language: Hindi
Pages: 152
Format: Paperback
Category: FAMILY & RELATIONSHIPS / Life Stages / General
Delivery Time: 7-9 Days

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