प्रस्तुत पुस्तक ‘‘भारत का प्राचीन एवं आधुनिक शिक्षा दर्शन’’ उस वैचारिक दृष्टि को दर्शाता है, जिसके माध्यम से शिक्षा के उद्देश्य, स्वरूप और मूल्य निर्धारित होते हैं, जहॉं प्राचीन शिक्षा दर्शन का उद्देश्य आत्मबोध, नैतिकता, चरित्र निर्माण और सर्वांगीण विकास करना था, वहीं आधुनिक शिक्षा दर्शन वैज्ञानिक दृष्टिकोण, व्यावहारिकता, लोकतांत्रिक मूल्यों और रोजगारोन्मुख पर आधारित है। दोनों का समन्वित लक्ष्य व्यक्ति को नैतिक, कुशल तथा सामाजिक रूप से उत्तरदायी नागरिक बनाना है। प्रस्तुत पुस्तक वास्तव में, भारत में समय-समय पर विकसित हुई शिक्षा संबंधी विचारधाराएँ, सिद्धांत और पद्धतियाँ हैं, जो कि एक ‘‘ऐतिहासिक एवं भौगोलिक दृष्टिकोण’’ के विकास को दर्षाता है, जिसमें वैदिक, बौद्ध, जैन, मध्यकालीन तथा आधुनिक काल तक की शिक्षा प्रणालियों के विकास और उनके उद्देश्यों का अध्ययन किया जाता है। अर्थात् भारत का षिक्षा दर्षन में यह जानना है, कि भारत में शिक्षा का स्वरूप युगानुसार कैसे परिवर्तित होता गया। इस पुस्तक में भारतीय षिक्षा की प्राचीन एवं आधुनिक षिक्षा परंपरा/प्रणाली की विवेचना की गई है। इस पुस्तक में प्राचीन भारत का शिक्षा दर्शन, भारतीय शैक्षिक चिन्तक, विभिन्न आयोग एवं समितियों, भारतीय षिक्षा व्यवस्था, षिक्षण पद्वतियों, राष्ट्रीय षिक्षा नीति, प्रारंभिक षिक्षा, षिक्षक-षिक्षा, षिक्षा में नवाचार, दूरस्थ षिक्षा एवं व्यावसायिक षिक्षा आदि पर प्रकाष डाला गया है। ‘‘भारत का प्राचीन एवं आधुनिक शिक्षा दर्शन’’ में भारतीय परंपरा के विभिन्न आयामों को पुस्तक के मुख्य पृष्ठ पर दर्शाते हुए प्रदर्षित किया गया है, जिसमें ‘‘दीपक’’ अज्ञान के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाने का द्योतक है, जो शिक्षा के आध्यात्मिक और नैतिक पक्ष को दर्शाता है। ‘‘पुस्तकें’’, ज्ञान-संपदा और शास्त्रीय परंपरा का प्रतीक होने के साथ ही, शिक्षा की निरंतरता, गहराई और विविधता को प्रकट करती हैं। ‘‘प्राचीन और आधुनिक’’ शब्द भारतीय शिक्षा की दो धाराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं-अर्थात् जहां प्राचीन-वेद्, उपनिषद्, गुरुकुल, और आध्यात्मिकता पर आधारित पारंपरिक शिक्षा को इंगित करता है, तो वहीं आधुनिक- विज्ञान, तकनीकी, डिजिटल शिक्षा, और वैष्विक दृष्टिकोण से जुड़ी समकालीन शिक्षा को इंगित करता है। ‘ॐ’ चिन्ह- यह भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है, जो शिक्षा को केवल जानकारी नहीं, बल्कि आत्मज्ञान से जोड़ता है, वहीं ॅप.थ्प संकेत (चिह्न) भी आधुनिक तकनीक और डिजिटल युग से जोड़ता है, और यह दर्शाता है कि आज की शिक्षा, प्राचीन ज्ञान और आधुनिक तकनीक का समन्वय बन चुकी है। अतः षिक्षा दर्षन की पृष्ठभूमि ऊर्जा, ज्ञान, शक्ति और पवित्रता का रंग है, जो वस्तुतः भारत की सांस्कृतिक भावना और शिक्षा की प्रेरणादायी ऊर्जा को दर्शाता है। इस प्रकार, ‘‘भारत का प्राचीन एवं आधुनिक शिक्षा दर्शन’’ नामक पुस्तक को प्राचीन परंपरा के ‘‘दीपक’’ और आधुनिक तकनीकी ‘‘प्रकाश’’ के संगम के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक षिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों, शोधार्थियों, षिक्षकों आदि से जुड़े पाठकों और सामान्य जन-सभी के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगी।
EDUCATION / Philosophy & Social Aspects
Bharat ka Prachin evam Aadhunik Shiksha Darshan
₹350.00
By: Dr. Siddharth Shukla and Dr. Rashmi Chaturvedi
ISBN: 9789366650289
Language: Hindi
Pages: 206
Format: Paperback
Category: EDUCATION / Philosophy & Social Aspects
Delivery Time: 7-9 Days

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