“दोस्त बताती थी मगर पूरा हक जताती थी” एक ऐसी कविताओं का संग्रह है जो हर उस शख्स के दिल की आवाज है, जिसे परवाह नहीं कि उसका पसंदीदा शख्स उसके पास है या नहीं,वो उसे मिल सका या नहीं बल्कि निस्वार्थ एक लंबी दूरी के बावजूद भी उसकी धड़कनों को सुनने से खुद नहीं रोक पाता, उन्हें दिल में आने पर पाबंदी नहीं लगा पाता। कभी हंस देता है उसकी मुस्कुराहट याद करके, कभी रो देता है उसकी आहट जान कर के। आप जानेंगे 12वीं कक्षा के कच्ची उम्र के, पक्के इश्क के धागों में बंधी दो धड़कनों को।
POETRY / General
Dost Batati Thi, Magar Poora Haq Jatati Thi
₹250.00
By: Muhammad Azad
ISBN: 9789366651965
Language: Hindi
Pages: 88
Format: Paperback
Category: POETRY / General
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