क्या तुमने कभी स्वयं से यह प्रश्न पूछा है— “यदि दुख इतना बुरा है, तो फिर वह जीवन का सबसे स्थायी सत्य क्यों है?” यह प्रश्न जितना सरल दिखाई देता है, उतना ही गहरा है। मानव सभ्यता के आरंभ से लेकर आज तक अनगिनत ऋषियों, संतों, दार्शनिकों, वैज्ञानिकों और साधकों ने इस प्रश्न को अलग-अलग दृष्टियों से समझने का प्रयास किया है। किसी ने दुख को कर्म का फल कहा, किसी ने उसे माया का परिणाम, किसी ने परीक्षा, किसी ने शुद्धिकरण, और किसी ने ईश्वर तक पहुँचने का सबसे पवित्र मार्ग। लेकिन क्या दुख वास्तव में केवल इतना ही है? क्या दुख केवल पीड़ा है… या वह एक ऐसी भाषा है, जिसमें स्वयं अस्तित्व हमसे संवाद करता है? यदि तुम इस पुस्तक को केवल अपने दुखों से छुटकारा पाने की आशा में पढ़ रहे हो, तो संभव है यह पुस्तक तुम्हारी अपेक्षाओं को बदल दे। क्योंकि इस पुस्तक का उद्देश्य तुम्हें दुख से भागना सिखाना नहीं है। इसका उद्देश्य तुम्हें उस स्थान तक ले जाना है, जहाँ तुम पहली बार अपने दुख को बिना भय, बिना क्रोध और बिना शिकायत के देख सको।
SELF-HELP / Spiritual
Dukh – Ek Adhyatmik Yatra
₹399.00
By: Kabir Shah
ISBN: 9789366654126
Language: Hindi
Pages: 278
Format: Paperback
Category: SELF-HELP / Spiritual
Delivery Time: 7-9 Days





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