गंगा के आँसू : मगध का उत्कर्ष केवल एक ऐतिहासिक उपन्यास नहीं, बल्कि सत्ता, साम्राज्यवाद, धर्म, नैतिकता और मानवीय मूल्यों के संघर्ष की एक विचारोत्तेजक गाथा है। यह कृति वैदिक एवं उत्तरवैदिक काल से लेकर मगध साम्राज्य के उत्कर्ष तक की ऐतिहासिक घटनाओं को साहित्यिक शैली में प्रस्तुत करती है। पुस्तक में मगध के शक्तिशाली शासकों—बिम्बिसार, अजातशत्रु, उदयन, शिशुनाग और महापद्म नंद—के शासनकाल, उनकी महत्वाकांक्षाओं, युद्धनीतियों तथा साम्राज्य विस्तार की कहानी को रोचक ढंग से चित्रित किया गया है। वैशाली और वज्जी संघ जैसे गणराज्यों के पतन, व्यापारिक मार्गों पर प्रभुत्व की राजनीति, बौद्ध एवं जैन धर्म के उदय तथा तत्कालीन सामाजिक व्यवस्था के अनेक पक्ष इस कथा के माध्यम से उभरकर सामने आते हैं। लेखक ने इतिहास, कल्पना और दर्शन का समन्वय करते हुए यह प्रश्न उठाया है कि क्या केवल शक्ति और विजय किसी राज्य को महान बना सकती है, या उसकी वास्तविक समृद्धि न्याय, धर्म, करुणा और जनकल्याण में निहित होती है। गंगा को साक्षी बनाकर प्रस्तुत यह कथा सत्ता के अहंकार, युद्ध की विभीषिका और मानवीय पश्चाताप का गहरा चित्रण करती है। यह पुस्तक इतिहास, भारतीय संस्कृति, प्राचीन राजनीति और दार्शनिक चिंतन में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए एक रोचक एवं विचारोत्तेजक पाठ है, जो अतीत की घटनाओं के माध्यम से वर्तमान के लिए भी महत्वपूर्ण प्रश्न छोड़ जाती है।
HISTORY / Historical Geography
Ganga Ke Aansu: Magadh Ka Utkarsh
₹250.00
By: Pramod Kumar
ISBN: 9789366650586
Language: Hindi
Pages: 190
Format: Paperback
Category: FICTION / Historical
Delivery Time: 7-9 Days


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