यह पुस्तक मानव चेतना के आंतरिक विज्ञान की एक गहन यात्रा है। यह मनुष्य के भीतर सोई हुई दिव्य शक्ति कुण्डलिनी को जगाने का मार्गदर्शन है।मनुष्य के शरीर में स्थित सात मुख्य चक्रों के माध्यम से यह बताती है कि किस प्रकार हमारा शरीर, मन और आत्मा एक ही ऊर्जा के विभिन्न स्तर हैं। यह ऊर्जा जब नीचे से ऊपर की ओर प्रवाहित होती है, तब साधक की चेतना क्रमशः स्थूल से सूक्ष्म, और सूक्ष्म से दिव्य बनती जाती है। प्रत्येक साधक स्वयं के भीतर झाँके, अपने भीतर की प्राणशक्ति को जाने, और यह समझे कि सच्ची साधना किसी बाहरी मंदिर में नहीं, बल्कि अपने ही शरीर में आरंभ होती है। क्योंकि यह शरीर ही परमात्मा का मंदिर है, और प्रत्येक चक्र उस मंदिर का एक द्वार है, जो साधक को भीतर के ब्रह्म तक पहुँचाता है।इस पुस्तक में मूलाधार से लेकर सहस्रार चक्र तक की यात्रा का क्रमवार विश्लेषण किया गया है।प्रत्येक चक्र के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक प्रभावों का गहराई से वर्णन किया गया है। साधक यह जान सकेगा कि कौन–सा चक्र कब सक्रिय होता है, और उसका हमारे जीवन, विचार और व्यवहार पर क्या प्रभाव पड़ता है।
Spiritual / Metaphysical / Self-Realization
Kundalini Yog Sadhana Evam Manovigyan
₹350.00
By: Maharishi Shrenik
ISBN: 9789366656021
Language: Hindi
Pages: 222
Format: Paperback
Category: RELIGION / Spirituality
Delivery Time: 7-9 Days
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