“मणि तरंग” काव्य-संग्रह 25 कविताओं का एक अनंत सागर है, जिसमें भावनाएँ और विचार जल की तरंगों के समान निरंतर उठते-गिरते रहते हैं। “मणि तरंग” मेरे हृदय के भीतर उठी उन्हीं सूक्ष्म तरंगों का एक विनम्र संग्रह है—ऐसी तरंगें जो कभी ज्ञान का बोध कराती हैं, तो कभी जीवन के क्षणिक सुखों में छिपे अनिश्चित दुःख की ओर संकेत करती हैं। इस संग्रह की प्रत्येक कविता एक ‘मणि’ के समान है, जिसे मैंने अपनी जीवन-यात्रा के विभिन्न पड़ावों से चुना है। इन कविताओं के केंद्र में जीवन का वह सत्य है जिसे मैंने अपने अनुभव से समझा है—कि यह देह एक रथ है, आत्मा इसकी सवारी है, और हमारा ‘मन’ ही वह ‘सारथी’ (ड्राइवर) है जो इस जीवन-गाड़ी को चला रहा है। चूँकि मन स्वभाव से चंचल और भटकने वाला है, इसलिए उसे वश में करने के लिए ‘विवेक’ की लगाम और ‘बुद्धि’ के कोड़े की आवश्यकता अनिवार्य है। यह दर्शन मेरी लेखनी का मूल आधार है।
POETRY / General
Mani Tarang
₹199.00
By: Er. Rakesh Mani Tripathi (Mani Ji)
ISBN: 9789366652115
Language: Hindi
Pages: 78
Format: Paperback
Category: POETRY / General
Delivery Time: 7-9 Days





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