मनुष्य ने सदियों से जाग्रत जीवन को ही वास्तविकता का केंद्र माना है। हम सुबह आँखें खोलते हैं और मान लेते हैं कि यही सत्य है—यही धरती, यही आकाश, यही संबंध, यही संघर्ष। किंतु हर रात, जब हम नींद के हवाले होते हैं, तब एक और संसार हमारे भीतर खुलता है—अदृश्य, अनियंत्रित, परंतु अत्यंत जीवित। हम उसे “सपना” कहकर टाल देते हैं, मानो वह केवल मस्तिष्क की थकान से उपजा हुआ दृश्य हो। पर क्या वास्तव में ऐसा ही है? क्या यह संभव नहीं कि जिस संसार को हम स्वप्न समझते हैं, वह किसी गहरी वास्तविकता का द्वार हो—एक ऐसी सभ्यता का प्रवेशद्वार, जो हमारी जाग्रत दुनिया से कहीं अधिक प्राचीन, व्यापक और चेतन है?
SELF-HELP / Spiritual
Neend Ke Bhitar Ka Sansar
₹299.00
By: Kabir Shah
ISBN: 9789366659978
Language: Hindi
Pages: 168
Format: Paperback
Category: SELF-HELP / Spiritual
Delivery Time: 7-9 Days





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