यह पुस्तक किसी विचार, सिद्धांत या परंपरा से जन्मी हुई रचना नहीं है, बल्कि उस मौन की गहराई से उठी हुई आंतरिक पुकार है जहाँ शब्द समाप्त हो जाते हैं और केवल अनुभव शेष रह जाता है। मानव इतिहास ने अनादि काल से “ॐ” को एक ध्वनि, एक मंत्र, एक प्रतीक और एक दिव्य आरंभ के रूप में देखा है, परंतु इस पुस्तक का उद्देश्य इन सीमित अर्थों को पार कर उस जीवित सत्य तक पहुँचना है जहाँ ॐ केवल उच्चारित नहीं होता, बल्कि चेतना के रूप में प्रकट होता है। यह ग्रंथ ज्ञान देने के लिए नहीं, बल्कि भीतर सोई हुई स्मृति को जगाने के लिए लिखा गया है—क्योंकि जो सत्य खोजा जा रहा है, वह बाहर कहीं नहीं, बल्कि स्वयं साधक की निस्पंद उपस्थिति में पहले से ही विद्यमान है। जब सृष्टि का प्रथम कंपन शून्य की गोद में जागा होगा, तब वही कंपन आगे चलकर ॐ के रूप में अनुभव किया गया, और वही कंपन आज भी प्रत्येक श्वास, प्रत्येक हृदय-स्पंदन और प्रत्येक मौन के पीछे अदृश्य रूप से धड़क रहा है; इसीलिए यह पुस्तक पढ़ने का विषय नहीं, बल्कि धीरे-धीरे भीतर उतरने की एक साधना है।
Spirituality / Philosophy
Om Maun Mein Poorn Hota Jeevan
₹250.00
By: Kabir Shah
ISBN: 9789366655888
Language: Hindi
Pages: 120
Format: Paperback
Category: RELIGION / Spirituality
Delivery Time: 7-9 Days


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