श्रीमद्भगवद्गीता अनन्त भगवान के श्रीमुख से निकली हुई दिव्य वाणी होने के कारण विश्व का अद्वितीय ग्रंथ है। भगवद्गीता सम्पूर्ण वैदिक शिक्षाओं के तत्त्वार्थ का सार संग्रह है। इसकी शिक्षाओं का ज्ञान सभी मानवीय महत्वकांक्षाओं की सिद्धि कराने वाला है. ईश्वर या ब्रह्मतत्व या सत तत्व ही भारतीय संस्कृति का मस्तिष्क है. उसी से विश्व और मानव दोनों का विकास हुआ है। भगवदतत्व द्वारा उपदिष्ट जो वेदविद्या या उपनिषद विद्या है उसी का सारांश गीता में आया है. यह महती सारगर्भित उक्ति है. वेदों में प्रवृति और निवृत्ति दोनों भागों का समन्वय है, वे दोनों धाराएं गीता शास्त्र में मिलती हैं और इनका सर्वोत्तम रूप मानव जीवन को भूषित करने के लिए गीता में बताया गया है। गीताशास्त्र के गहन अध्ययन-मनन करने के उपरान्त यह पुस्तक प्रस्तुत कर रही है। इसको यथासंभव सरल, सुबोध शैली में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है, ताकि सुधी पाठक इसे सरलता से हृदयंगम कर सके lसाथ ही इसे विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है ताकि महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं को पाठ्य सामग्री उपलब्ध हो सके। प्रस्तुत पुस्तक चतुर्थ परिच्छेदों में विरचित है, जिनमें प्रस्थानत्रयी का अर्थ, प्रस्थानत्रयी के अन्तर्गत आने वाले तीन ग्रंथों तथा भगवद्गीता की विशिष्टता का विस्तृत विवेचन है। अंत में परिशिष्ट में भगवद्गीता के कतिपय स्मरणीय पृष्ठों का उल्लेख है। साथ ही पारिभाषिक शब्दावली और बोध प्रश्न भी दिए गए हैं. आशा है, यह पुस्तक प्रज्ञों, जिज्ञासुओं तथा विद्याधन छात्रों के लिए अधिक उपयोगी होगी।
RELIGION / Spirituality
Prasthaantrayi Granthon Mein Geeta Ki Vishishtata
₹299.00
By: Dr. Nimisha Tripathi
ISBN: 9789366651484
Language: Hindi
Pages: 196
Format: Paperback
Category: RELIGION / Spirituality
Delivery Time: 7-9 Days





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