“वजूद” केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, नैतिक मूल्यों और मानवीय चरित्र की एक गहन साहित्यिक यात्रा है। यह पुस्तक पाठक को बाहरी पहचान से आगे बढ़कर अपने वास्तविक अस्तित्व—अपने किरदार—की खोज करने के लिए प्रेरित करती है। आज के भौतिकवादी और प्रतिस्पर्धी युग में सफलता को प्रायः धन, पद और प्रसिद्धि से आँका जाता है, जबकि इस पुस्तक का मूल संदेश है कि इंसान की सबसे बड़ी पहचान उसका चरित्र होता है। सत्य, ईमानदारी, ज़मीर, मोहब्बत, रहमदिली, अनुशासन, संघर्ष, सेवा और विरासत जैसे जीवन-मूल्यों को सहज, प्रभावशाली और साहित्यिक शैली में प्रस्तुत किया गया है। हिन्दी भाषा में उर्दू की मिठास और अदबी लहजे के साथ लिखी गई यह पुस्तक प्रेरणात्मक गद्य, सूक्तियों, आत्ममंथन, आज़ाद नज़्मों और जीवन-दर्शन का सुंदर संगम है। प्रत्येक अध्याय पाठक को केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि स्वयं से संवाद करने और अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रेरित करता है। “वजूद” उन सभी पाठकों के लिए एक प्रेरक साथी है, जो केवल सफल नहीं, बल्कि एक सच्चा, संवेदनशील और आदर्श इंसान बनने की आकांक्षा रखते हैं।
SELF-HELP / Motivational & Inspirational
Wajood: Insan Ki Sabse Badi Pehchan – Kirdaar
₹199.00
By: Shadab Ahmed Shamim Usmani
ISBN: 9789366655826
Language: Hindi
Pages: 104
Format: Paperback
Category: SELF-HELP / Motivational & Inspirational
Delivery Time: 7-9 Days





Aditya Kumar –
वजूद: इंसान की सबसे बड़ी पहचान—किरदार
लेखक: शादाब अहमद शमीम उस्मानी
कुछ किताबें पढ़ी जाती हैं, कुछ समझी जाती हैं और कुछ किताबें सीधे दिल में उतर जाती हैं। “वजूद: इंसान की सबसे बड़ी पहचान—किरदार” ऐसी ही एक कृति है।
Aditya Kumar –
वजूद: इंसान की सबसे बड़ी पहचान—किरदार
लेखक: शादाब अहमद शमीम उस्मानी
कुछ किताबें पढ़ी जाती हैं, कुछ समझी जाती हैं और कुछ किताबें सीधे दिल में उतर जाती हैं।
Aditya –
वजूद: इंसान की सबसे बड़ी पहचान—किरदार
लेखक: शादाब अहमद शमीम उस्मानी
कुछ किताबें पढ़ी जाती हैं, कुछ समझी जाती हैं और कुछ किताबें सीधे दिल में उतर जाती हैं।
Gulshan Aziz –
वजूद: इंसान की सबसे बड़ी पहचान—किरदार
लेखक: शादाब अहमद शमीम उस्मानी
कुछ किताबें पढ़ी जाती हैं, कुछ समझी जाती हैं और कुछ किताबें सीधे दिल में उतर जाती हैं।
Gulshan Aziz –
वजूद: इंसान की सबसे बड़ी पहचान—किरदार
लेखक: शादाब अहमद शमीम उस्मानी
“वजूद” एक ऐसी पुस्तक है जो पाठक को केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि अपने भीतर झाँकने के लिए मजबूर करती है। यह हमें याद दिलाती है कि दुनिया हमें हमारे नाम से जान सकती है, हमारी उपलब्धियों से पहचान सकती है, लेकिन अंततः हमें याद हमारे किरदार के लिए ही रखा जाता है।
Bablu Peshkar –
“वजूद” नई पीढ़ी से कहती है—अपनी पहचान बनाने से पहले अपना किरदार बनाइए; क्योंकि पहचान लोग देते हैं, लेकिन किरदार आप स्वयं बनाते हैं।
वजूद: इंसान की सबसे बड़ी पहचान—किरदार
लेखक: शादाब अहमद शमीम उस्मानी
Bablu Peshkar –
“वजूद” पढ़कर शायद हम दुनिया को तुरंत न बदल पाएँ, लेकिन अपने भीतर झाँकने की शुरुआत ज़रूर कर सकते हैं।
यह पुस्तक दिल को छूती है, सोच को जगाती है और अंततः इंसान को इंसान बने रहने की याद दिलाती है।