“जब ज्ञान शब्दों से ऊपर उठकर अनुभव बन जाता है, जब साधना कर्मकाण्ड से आगे बढ़कर आत्मा का मौन संवाद बन जाती है, और जब गुरु किसी व्यक्ति का नाम न रहकर स्वयं चेतना का प्रकाश बन जाते हैं—तभी दत्तात्रेय का वास्तविक दर्शन प्रारम्भ होता है।” भारत की आध्यात्मिक परम्परा जितनी प्राचीन है, उतनी ही गहन भी है। इस परम्परा में वेदों का ज्ञान है, उपनिषदों का मौन है, ऋषियों का तप है, योगियों की साधना है और संतों का प्रेम है। इन्हीं दिव्य धाराओं के मध्य एक ऐसी अद्वितीय चेतना प्रवाहित होती है, जो किसी एक मत, पंथ, संप्रदाय अथवा युग की सीमा में बंधी नहीं है। वही चेतना श्री गुरु दत्तात्रेय के रूप में युगों से साधकों का मार्ग आलोकित करती आ रही है।
Philosophical & Spiritual Non-Fiction
Dattatreya Sanhita: Shri Guru Dattatreya ke 54 Divya Rahasya
₹399.00
By: Kabir Shah
ISBN: 9789366654324
Language: Hindi
Pages: 278
Format: Paperback
Category: Philosophical & Spiritual Non-Fiction
Delivery Time: 7-9 Days




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