मनुष्य स्वयं को जानने की यात्रा पर जितना आगे बढ़ता है, उतना ही यह अनुभव करता है कि उसका अस्तित्व उन सीमाओं से कहीं अधिक व्यापक है, जिन्हें वह सामान्यतः अपनी पहचान मानकर जीता है। हम अपने नाम, शरीर, विचारों, भावनाओं और सामाजिक भूमिकाओं के माध्यम से स्वयं को परिभाषित करते हैं, किन्तु क्या यही हमारी सम्पूर्ण वास्तविकता है? यह प्रश्न नया नहीं है। सभ्यता के प्रारम्भ से ही मनुष्य ने अपने भीतर विद्यमान उस रहस्य को समझने का प्रयास किया है, जो जन्म, जीवन, अनुभव, स्मृति, स्वप्न, प्रेम, पीड़ा, मृत्यु और चेतना के माध्यम से स्वयं को अभिव्यक्त करता है। प्राचीन ऋषियों ने इस रहस्य को केवल दार्शनिक चिन्तन का विषय नहीं माना, बल्कि प्रत्यक्ष अनुभव का क्षेत्र माना। उन्होंने कहा कि मनुष्य एक ही स्तर पर अस्तित्व नहीं रखता, बल्कि उसके भीतर अनेक परतें, अनेक आयाम और अनेक प्रकार की चेतन सक्रियताएँ कार्य करती हैं।
Philosophical & Spiritual Non-Fiction
Manushya Ke Char Sharir Aur Unka Vigyan
₹399.00
By: Kabir Shah
ISBN: 9789366653334
Language: Hindi
Pages: 248
Format: Paperback
Category: Philosophical & Spiritual Non-Fiction
Delivery Time: 7-9 Days




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