मनुष्य ने हजारों वर्षों से एक ही दिशा में यात्रा की है। उसने आकाश की ओर देखा, मंदिर बनाए, मस्जिदों में सिर झुकाया, गिरजाघरों में प्रार्थनाएँ कीं, गुरुद्वारों में सेवा की, पर्वतों पर तप किया, समुद्रों के किनारे ध्यान लगाया और अनगिनत ग्रंथों के पन्ने पलटे। वह लगातार एक प्रश्न पूछता रहा—”ईश्वर कहाँ हैं?” परंतु शायद इस समस्त यात्रा के बीच एक प्रश्न ऐसा भी था, जिसे पूछने का साहस बहुत कम लोगों ने किया—”यदि एक क्षण के लिए ईश्वर मेरी दृष्टि से संसार को देखें, तो क्या वे मेरे प्रत्येक निर्णय को उचित कहेंगे?” यह पुस्तक उसी भूले हुए प्रश्न से जन्मी है। यह किसी धर्म का विस्तार नहीं, किसी मत का समर्थन नहीं, किसी परंपरा का विरोध नहीं और किसी आस्था का विकल्प भी नहीं है। यह एक चेतनात्मक प्रयोग है। एक ऐसी कल्पना, जिसमें तुम्हें किसी सिंहासन पर बैठाकर पूजा नहीं जाएगी, बल्कि तुम्हारे सामने समस्त सृष्टि का उत्तरदायित्व रख दिया जाएगा। यहाँ शक्ति तुम्हें आकर्षित नहीं करेगी; वह तुम्हें परखेगी। यहाँ ज्ञान तुम्हें महान नहीं बनाएगा; वह तुम्हें विनम्र बनाएगा। और यहाँ निर्णय तुम्हारी बुद्धि से नहीं, तुम्हारी चेतना की गहराई से जन्म लेंगे।
RELIGION / Spirituality
Ishwar Banane Ki Antim Pariksha
₹350.00
By: Kabir Shah
ISBN: 9789366654010
Language: Hindi
Pages: 182
Format: Paperback
Category: RELIGION / Spirituality
Delivery Time: 7-9 Days





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